Wednesday, October 21st, 2026

पान की खेती में बदलाव कर किसान बढ़ाएं आय

 
वाराणसी 

राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (लखनऊ) के सेवानिवृत्त प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रामसेवक चौरसिया ने कहा कि पान की खेती का भविष्य उज्ज्वल है। बशर्ते इसके प्रति किसानों को जागरूकता किया जाए। अब इसकी वैज्ञानिक तरीके से खेती हो रही। लेकिन अब भी किसान पुरानी पद्धति से खेती कर रहे हैं। उनको इसमें बदलाव करना होगा, तभी उनकी आय दोगुनी होगी।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत उद्यान विभाग की ओर टिकरी गांव स्थित राममूर्ति आईटीआई कॉलेज परिसर में लगे दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण गोष्ठी एवं किसान मेला के शुभारंभ पर उन्होंने यह विचार रखे। कहा, आज पान की मार्केटिंग, प्रयोग के तरीके बदले हैं। इसका औषधीय कार्य में भी प्रयोग होता है। पान के 14 गुण हैं, जिसमें त्रिदोष नाशक, मुख शोधक, पाचक रस, गैस नाशक, कीटाणु नाशक, जागृति उत्पन्न करने, कैंसर रोधी आदि गुण हैं। डॉ. चौरसिया ने देसी, दसावर, सांची, गोल्ड, कपूरी, मगही, मीठा, बंगला, सोफिया आदि पान की प्रजातियों के गुणों व पान की खेती के तरीके के बारे में बताया। मुख्य अतिथि विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह ने पान के औषधीय महत्व एवं पूजा पाठ में प्रयोग के बारे में बताया।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय बीएचयू के वैज्ञानिक प्रो. पीके त्रिपाठी ने पान की खेती में जल प्रबंधन के बारे में बताया। डॉ. एके पाल पान में लगने वाले रोग और सह फसली खेती के रूप में परवल, कुंदरु, टमाटर, लोबिया करते हुए आय में गुणात्मक वृद्धि के बारे में जानकारी दी। जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि वर्गमीटर का बरेजा लगाने पर किसानों को 25 हजार रुपये और एक हजार वर्ग मीटर का बरेजा लगाने पर 50 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है। डॉ. एनके सिंह, जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य, सृजन संस्था के प्रबंधक अनिल कुमार सिंह ने भी विचार रखे। स्मारिका का विमोचन हुआ और नौ किसानों को अनुदान प्रमाण पत्र दिया गया। मेले में वाराणसी के अलावा सोनभद्र और जौनपुर के करीब चार सौ किसान आए थे। संचालन ज्योति कुमार सिंह ने किया। इस मौके पर दीपा जायसवाल, सुशील कुमार, अमित सिंह, हरिशंकर सिंह, गोरखनाथ सिंह, रवींद्र सिंह, सुधांशु कुमार सिंह, सुनील, अशोक आदि मौजूद रहे।

 

#पान की खेती

Source : Agency

पाठको की राय